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टैली में Group क्या है? Groups in Tally

Hello Friends, आपने कही न कही पर Tally ERP 9 Software के बारे में पढ़ा या सुना तो जरूर होगा। वैसे देखा जाए तो Accounts को Maintain करने के लिए आज जो सबसे ज्यादा Famous Software है, वो Tally ही है. आज के अपने इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि Tally Me Group Kya Hai? Tally में Group को कैसे बनाते है और टैली Groups कितने होते है,इन Groups का Tally में आखिर उपयोग क्या है।Group से Related सभी जानकारी आज मैं आपके साथ shear करुगा, तो आइए जानते है।

Group क्या है? What is Groups in Tally?

Groups की मदद से हम Tally में Ledgers बनाते है. Groups अपने आप मे ही एक तरह Collection है जिसके Through Tally के अंदर सभी final Reports मतलब की सभी final Accounts बनाये जाते है।

देखा जाए तो टैली में Groups एक तरह का Collection होता है,ढेर सारे Ledger’s का, और किसी भी Ledger को बनाते समय हमको उसे एक Group में रखना होता है क्योंकि हर एक Group का अपना एक Particular Nature Tally ERP Software में Define किया गया है। Tally ERP 9 में कुल 28 Groups होते है और जिनमे 15 Primary Group होते है और 13 Sub Group होते है।

groups kya hai

इन आर्टिकल को पढ़े।

 

 Tally Group Details:-

  1. Bank Accounts
  2. Bank Occ A/c
  3. Bank Od Accounts
  4. Branch/Division
  5. Capital Account
  6. Cash-in-hand
  7. Current Assets
  8. Current liabilities
  9. Deposit(Assets)
  10. Direct Expenses
  11. Direct Incomes
  12. Duties & Taxes
  13. Expenses(Direct)
  14. Expenses(indirect)
  15. Fixed Assets
  16. Income(Direct)
  17. Income(indirect)
  18. Indirect Expenses
  19. Indirect Incomes
  20. Investments
  21. Loans & Advances(Assets)
  22. Loans( Liabilities)
  23. Provisions
  24. Purchase Accounts
  25. Reverse & Surplus
  26. Sales Accounts
  27. Secure Loans
  28. Stock-in-hand
  29. Sundry Creditors
  30. Sundry Debtors
  31. Suspense Accounts
  32. Unsecured Loans

 

Groups in Tally With Example.

1.Bank Account: जो भी हमारे Current Account या Saving Bank Account का Ledger हो तो उसे हम Bank account Group में रखेंगे. Example: SBI Bank A/c, PNB Bank A/c, IDBI Bank A/c etc.

2.Bank O/D (Bank Overdraft) & Bank OCC(Bank Overdraft cash credit):-जब भी हम किसी Bank से Loan लगे तो Bank Loan का जो Ledger होगा उसको हमको Bank o/d या Bank Occ में से किसी भी एक Group में रखना होगा।

3. Branch /Division:- जब भी कोई Company जिसकी बहुत सारी ब्रान्च है, वो भी अलग-2 State में या फिर District में तो वो Branch/Division की मदद से Bank Account Open कर सकती है, इस तरह के Account को हम Branch/Division के Group में रखेंगे।। Example जैसे कि Delhi की Branch अलग और Allahabad की Branch अलग।

4. Capital Account: जो भी कोई Businessman होता है और वो अपने Business में Paisa जब Invest करता है तो उसके लिए हमको जो group use करना होता है वो होता है,Capital Account group। Example (Capital, Drawing, LIC, Income Tax को हम Capital A/c group में रखेंगे).

5.Secure Loans: जब भी हम ऐसा Loan लेते है जो Bank के सिवा आपने किसी और से लिया है मतलब की कोई Security को रखकर आपने कोई Loan लिया है तो उसे हम Secure Loan के Group में रखेंगे.

Example आपने Bajaj Finance से कोई Loan लिया है,जैसे Car Finance पर ली है, Gold Loan लिया है, Building को गिरवी रखकर Loan लेना चाहते है,इस तरह के Loan जिनमे आपको Security रखकर फिर Loan ले रहे है, ऐसे सभी Loans को हम Secure Loans के Group में रखेंगे।

6.Unsecured Loans:- जब हम अपने किसी Friends या फिर Relatives से कोई Loan लेते है तो उन्हें हम Unsecured Loans के Group में रखते है।

7.Loan& Advance (Assets): जब हमें किसी को Loan देना हो या फिर Advance Payment करना हो तो उसको हम Loan & Advance(Assets) के groups में रखेंगे। Example- Advance Salary Loan To Deepak Etc.

8.Deposit(Assets): जब भी हम ऐसा कोई Investment करते है जिसमे हमे Time-Period और Profit Decide हो और हमको पहले से पता हो कि मै कितना पैसा Invest कर रहा हूँ और मुझे इतने time के बाद पैसा मिल जाएगा,तो उसको हम Deposit(Assets) के Groups में रखेंगे। Example- FD (Fixed Deposit), RD, KVP, NSC, PPF या फिर Gov की जितनी भी योजना होती है, Bonds होते है उनको हम Deposit(Assets) Group में रखते है।.

9.Investment: ऐसा निवेश जिसमे समय सीमा और लाभ पूण निर्धारित नही होता और आप ऐसे निवेश करए है,जिसमे आपको पता नही होता है कि Profit होगा या नही होगा, या फिर होगा तो कितने समय के बाद होगा, ये भी Fixed नही की Profit होगा कि Loss. अगर देखा जाए तो Loss भी हो सकता है तो ऐसे Legers को हम Investment Group में रखेंगे।
Example- Share, Mutal Funds, Lottery.

10.Direct Expenses: वो सभी खर्चें  (Expenses) जो Factory से Related होते है और हमारे Production को Effect करते है,उन सभी Ledgers को हम Direct Expenses में रखते है। Example.Wages, Power bill, Factory Rent, Factory Insurance, Carriage Inward Etc.

11. Indirect Expenses: ऐसे सभी खर्चें (Expenses) जो Office से Related होते है, उन्हें हम Indirect Expenses के Group में रखते है Example: Discount Paid, Rent Paid, Commission Paid, Interest paid, Bad Debts, Salary Paid Etc

12.Indirect Incomes: ऐसी Incomes जो Goods को Sale करने के अलावा हमे Received होती है उन सभी के Ledgers को हम Indirect income के Group में रखते है। Example: Discount Receipt, Rent Receipt, Commission Receipt, Interest Receipt Etc.

13.Duties&Taxes: Income Tax को छोड़कर जितने भी तरह के Tax हम Use करते है उन सभी Tax के Ledgers को हम Duties And Taxes Ledgers में रखते है।। Example Sales Tax, CST, VAT, TDS, Service Tax, GST, SB Cess, KK Cess, Surcharges Etc.

14. Fixed Assets: ऐसे Property मतलब सम्पति जो हम Sale करने के लिए नही खरिदते और जो Life Long होती है ,उपयोग करने के लिए उनको हम Fixed Assets के Group में रखते है।

Example Plant, Machinery, Building, Land, computer, car, Furniture, Cycle Etc.

15.Provision: Business में Future Coss से बेचने के लिए हमे कुछ funds बनाने पड़ते है,उन्हें ही हम Provision कहते है।

Example: Provision For Bad debts, Provision For Income Tax, Provision For Sundry Creditors, Provision For Sundry Debtors.

16.Purchase Account: हम जो भी माल (Goods) को Purchase और Purchase Return करेगे, उन सभी Ledger को हम Purchase Group में रखेंगे।

17.Sale Account: हम जो भी माल (Goods) को Sale और Sale Return करेगे,तो उन सभी को हम Sales Account के Group में रखेंगे।

18.Sundry Creditors: Business में हमे जिन Parties से या फिर जिन लोगो से (Credit) पर माल को खरिदते है और जिनको की हमको पैसे देने होते है उन सभी Ledger’s को हम Sundry Creditors के Group में रखेंगे।

19.Sundry Debtors: ऐसे सभी Parties जिनको हम उधार पर माल Sale करते है और जिनसे हमे पैसे लेने होते है,उन सभी Ledgers को हम Sundry Debtors के Group में रखेंगे।

Download The Tally Ledger And Group List File

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इन आर्टिकल को भी पढ़े।

Tally में Group कैसे बनाये? Create Groups in Tally

Tally Me Group Banane के लिए सबसे पहले आप Masters में Accounts info में जाएगे, और फिर Groups के option पर Click करेगे. उसके बाद आप Create के ऑप्शन पर Click करेगे. यहाँ आपको Single Group में (Create, Display, Alter )And Multi Group में भी (Create, Display, Alter ) का Option दिखाई देगा। आइये सबसे पहले जानते है कि  (Create, Display, Alter ) क्या होता है।

Group Creation

  1. Create: Create के Option पर जाकर हम किसी भी Group को Create कर सकते है।
  2. Display: Display के Option पर जाकर हम उस Create किये हुए Group को देख सकते है।
  3. Alter:  Alter के Option का उपयोग हम उस Group को Modify करने के लिए Use करते है मतलब की हम उस Group को Edit कर सकते है और Delete भी कर सकते है।

STEP-1: Group को बनाने के लिये हम Create के Option पर जाकर Click करेगे।

create Group

STEP-2: Name Ke Box में हम उस Group का नाम लिखेगे जैसा यह पर हमने एक group बनाया है जिसका नाम हमने Staff दिया हुआ है।Group name

STEP-3: Alias के option में हम कोई एक Short Name या फाई कोई उपनाम लिख सकते है,जिसकी मदद सड़ हम उस Group को बहुत ही आसानी के साथ Access कर सकते है।Alias Short

STEP-4: Under के Option में आपको एक Group को Select करना होगा क्योंकि हम जो भी Groups बनाएगे उसको किसी न किसी Group के under जरूर रखना पड़ेगा, तभी वो Group Work करेगा। यहाँ पर मैंने Staff नाम के group को Indirect Expenses नाम के group के अंदर रखा है।group name

Example Se Explain करते है.Suppose की आपके पास ढेर सारे Staff है, तो आप चाहते हो कि Staff का नाम आये और खुद लिखकर आये,की ये Staff का column है. तो Name में हम Staff लिख देगे और उसके Under में इसको हम Indirect Expenses Group में रख देंगे और फिर इस group को Save कर देंगे। अब हम Lists Of Groups में जाएगे तो हमको Staff Name का एक अलग ही Group Show होगा, तो इस तरह हम कोई भी Is Group को अपनी सुविधानुसार Create कर सकते है।

Various Group List In Tally

groups in tally

Read Also:-

 

Single और Multi Groups क्या है।

Single Group Option की Help से हम एक Time में केवल एक ही Group Ko Create कर single group

Multi Group की मदद से हम एक साथ कई सारे groups को एक ही समय मे आसानी से बना सकते है।जिस से हमारे समय की काफी ज्यादा बचत होती है और Groups भी बहुत ही Create हो जाएंगे।

तो आज हमने सीखा की Tally Me Groups को किस तरह से Create कर सकते है ऑफ इन Groups का आखिर Tally में उपयोग क्या है, I Hope की अब आप इन सभी Process से Groups को Tally में आसानी से Create करना सीख गए होंगे।

आइये Debit/ Credit के कुछ Rules को Discuss करे:-

Tally मे अक्सर हमे  Debit And credit मे हमेशा Confusion Create होती है , की किसे Debit करे और किसे Credit करे, इसलिए मैं आज आपको कुछ Rules को बता रहा हु जिसकी मदद से आप आसानी से  debit Aur credit को कर सकेगे, तो आइये जानते है। 

Debit Rule:-

  • जिस को पैसा मिलता है, वो हमेशा Debit होगा.
  • हमारे सारे खर्चे  Means Expenses Debit होगे.
  • जो भी वस्तु Business मे आएगी, वो सभी Debit होगी.

Credit Rule:-

  • जिसके पास से पैसा जाएगा वो हमेशा Credit होगा। 
  • हमारी सारी  Incomes Credit होगी। 
  • जो वस्तु  Business से जाएगी उसको हमेशा Credit करेगे.

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पोस्ट से संबंधित सारांश:-

आज की इस आर्टिक्ल मे मैंने आपको बताया की Tally Me Group Kya Hai? Aur Tally Me Group Ko Kaise Banaye.साथ ही साथ मैंने सभी Groups के बारे मे विस्तारपूर्वक आपको पूरी जानकारी दी। 

अगर आपको Tally Me Group banane  मे कोई भी परेशानी हो, तो आप मुझे मेल कर सकते है , मैं जल्दी ही आपकी परेशानी को दूर करने की पूरी कोशिश करुगा। मैं उम्मीद करता हु की आपको ये आर्टिक्ल पसंद आया होगा, अगर आपको ये आर्टिक्ल पसंद आया हो तो इसको सोश्ल मीडिया पर अपने दोस्तो के साथ जरूर से शेयर कीजिए, जिस से उनको भी ये जानकारी प्राप्त हो सके।

इस Article को पढ़ने के लिए धन्यवाद ! Technical Cube मे दुबारा Visit करे.

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